| 巴黎的街道空无一人, |
| 市民们潮水般涌向塞纳河滨, |
| 法国的太阳灿烂依旧, |
| 在它高傲的额头却投下了阴影。 |
| 欢乐的巴黎人肃静无声, |
| 新的光荣盛宴已吸引不了他们; |
| 一位戎马倥偬的英雄正向他们走来, |
| 他是欧罗巴的灾难,法兰西的尊神。 |
| 炮声隆隆,旌旗飘扬, |
| 一队银发苍苍的沙场老将, |
| 护送着光荣的皇帝的遗骸, |
| 缓缓行进在通往巴黎的路上。 |
| 高傲的首都又象某个时候那样, |
| 拜倒在自己尊神的脚边, |
| 尽管更痛苦的惩罚迫在眉睫, |
| 但她毫不畏惧, |
| 因为胸中燃烧着复仇的火焰。 |
| 啊!战争和死亡的音乐, |
| 使法国人的心脏激烈地跳动; |
| 他进入巴黎,依然象奥斯特尔利茨战役后那样光荣! |
| 依然象马连峨会战时那样威风! |
| 当年,他紧闭着沉默寡言的、苍白的双唇, |
| 骑马穿过景仰的人群, |
| 如今,他那圣洁的遗体, |
| 在人群中缓缓前进。 |
| 近卫军在哪里? |
| 斯拉夫族的常胜将军东布罗夫斯基在哪里? |
| 剽悍的缪拉特在哪里?波尼亚托夫斯基在哪里? |
| 最最骁勇的元帅奈又在哪里? |
| 无数英勇的战士成了恶运的牺牲品, |
| 滑铁卢的炮火把他们化为灰烬, |
| 幸存的近卫军在这里庄严地行进, |
| 唯独蒙托隆带着镣铐忍受苦刑。 |
| 古老而又年轻的法国的精萃, |
| 在灵柩后紧紧地跟随。 |
| 举国哀恸:狂热的共和派 |
| 也和大家共洒泪水。 |
| 你知道, |
| 在谁的额头并列着胜利的印记和痛苦的痕迹? |
| 是谁穿着丧服,挺着高傲的身躯? |
| 这是波兰人的送葬队伍。 |
| 钢铁、石头建造的拱门和圆柱, |
| 也在向皇帝致敬, |
| 那上面熊熊的火焰, |
| 是皇帝毕生燃起的豪情。 |
| 宫殿里一片死寂,皇冠上沾满灰尘, |
| 傲慢的美梦终成泡影, |
| 他象亚历山大一样, |
| 还未将皇位传给后代,自己就长眠不醒。 |
| 皇帝安睡了,祭礼已经完毕; |
| 在庄严肃穆的幽暗中, |
| 圆柱象守灵的卫士默默伫立; |
| 这座庙宇就是已故上帝的寝陵。 |
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弗·恩格斯写于1840年12月 载于1841年2月《德意志电讯》杂志第23期 署名:弗里德里希·奥· 原文是德文 |
注 释
130 这首诗是恩格斯就1840年将皇帝拿破仑第一的遗骸从圣海伦岛迁往巴黎一事而作。——第164页。